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Showing posts from August 9, 2026

बीता हुआ एक दिन...

 सुबह उठी, उठना नहीं चाहती थी, लेकिन अलार्म ने सोने नहीं दिया। आधी नींद में ही मैंने ट्रेन ट्रैकिंग ऐप पर अपनी ट्रेन का समय देखा, राइट टाइम थी। आधी खुली आँखों से सीधा रसोई की ओर मुड़ी, कुकर हाथ में लिया, लेकिन फिर रख दिया। खिचड़ी बनाने से पहले दाल चावल धोना होगा। मैने बर्तन में मूंग की दाल और चावल भिगो का रख दिए। मुझे बाथरूम जाना था, लेकिन मेरा शरीर मेरे कहने पर काम नहीं कर रहा था, किसी अवचेतन अनुबंध के प्रभाव में काम कर रहा था। मैने प्याज काटे, आलू छीला, खिचड़ी रख कर सीटी लगाने के बाद बाथरूम गई। बेटे को उठाया, लेकिन वो बार-बार सो जा रहा था। मैंने अम्मा को देखा, वो उठ चुकी थीं। लंगड़ाते हुए वो मेरे पीछे पीछे चलने लगीं। जो मुझसे छूटता गया, वे मुझे पकड़ाती गयीं।        गाड़ी आ चुकी थी, खिचड़ी रख ली गई थी, दही आ चुकी थी, बेटा उठ गया था, पापा सूटकेस गाड़ी में रख रहे थे, मैं भावशून्य मशीन की तरह करती जा रही थी जो जो करना था। तब तक बहन ने मीठी नीम की पत्तियां (करी पत्ता) हाथ में थमा दीं। अम्मा ने तोड़ कर दिया होगा.... लंगड़ाते हुए नीचे उतरी होंगी.... मीठी नीम की महक ने...